दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही

दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही
दिल है तो दर्द होगा,दर्द है तो इश्क़ होगा ही ,इश्क़ है तो अश्क़ होंगे , फिर आशिक़ शहीद होंगे ही.

Saturday, 11 November 2017

तड़पन

तड़पन

ये तो न्याय नहीं गिरधर ,इतनी बेबसी इतनी तड़पन 
जो सारी  उम्र रहे जोगी मोक्ष समय, दे दी उनको कैसी मायावी उलझन ,
हर बार बहक जाती है क्यों ये ,दिल की धड़कन भोली भाली
जाने किन  कदमो की आहट मुझको बेकल कर  देती है,
मैं  नहीं चाहती फिर भी क्यों एक इंतज़ार साँसों में है
है कोई नहीं जिसे चाहू पर,  दिल बेक़रार राहो में है,
ये घबराहट ये बेचैनी पहले तो कभी नहीं आयी
क्यों  आँखों में अब स्वप्ने  कुछ, रातो को चुभने लगते है,
 क्यों होंटो पर तन्हाइये में मुस्कान, यूँही आ जाती है
क्यों अब हमको बेरंग चित्र रंगो ,में रचे बसे  लगते,
ना, नहीं -नहीं ये प्यार नहीं ,ये जीवन का अहसास सनम
सारी  उम्र मुक्ति का जो इंतज़ार बस करते थे ,
जो जिन्दा थे पर जिए नहीं पर,अंतिम जब एक सांस बची 
उनको उस अंतिम लम्हे,जीवन ही जब बीत गया,  
क्यों फिर से दे दी  जीवन की, वो भूली आस सनम
ये तो न्याय नहीं गिरधर ,इतनी बेबसी इतनी तड़पन। 
shikhanari