दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही

दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही
दिल है तो दर्द होगा,दर्द है तो इश्क़ होगा ही ,इश्क़ है तो अश्क़ होंगे , फिर आशिक़ शहीद होंगे ही.

Thursday, 28 July 2011

अनुभूति


                                                                     अनुभूति 


मैं अनुभूति का एक सृजन  हूँ मैं अनभिज्ञ, नही हूँ 
मै समय मेघ के गर्जन से कम्पित अधरों की ,जुम्बिश हूँ ,
मैं चन्द पँक्तिया व्यथा कथा या विरह, गीत नही हूँ  
मैं उठती गिरती लहरो की एक वेग भरी ,सृष्टि हूँ ,
मैं गलत सही और अर्थ अनर्थ मे उलझी प्रथा, नही हूँ 
मैं सहज सरल हंसती गाती एक निर्मल स्वच्छ ,नदी हूँ ,
तुम निर्मल स्वच्छ सफेद मेघ  मैं प्रेम भरी बदली हूँ 
तुम पावस हो घनघोर सजन मैं युग- युग से, प्यासी हूँ ,
तुम गुलशन मे हो भर्मर अगर मै भर्मरों का ,गुंजन हूँ 
तुम सहज प्रेम की सरल धार मैं तेरी गति का स्पंदन हूँ ,
तू उमड़- घुमड़ के बरस रहा और मैं अहसासों से भीगी हूँ 
ये सोच- सोच के बादल से तुम आये हो फिर जाओगे ,
 विरह वेदना के डर से अंतर्मन तक, कम्पित हूँ 
ओ! सख्त बर्फ को प्रेम ताप से यूँ  पिघलानेवाले 
मुझ पत्थर को यूँ निर्मल सा नीर बनानेवाले 
मैं नीर - नीर हो कर अब सागर से मिलने को आतुर हूँ  ,
विरह मेघ से वाष्प रूप में रोज -रोज मिलती हूँ 
फिर तड़प - तड़प  कर  धरती पर बून्द -बून्द ,गिरती हूँ 
तुम मेघ  राज हो सजन मेरे मैं बस एक काली सी ,बदली हूँ 
क्यों मुझको ढूंढे मन तेरा ओ, प्रेम राज! हिमनंदन 
 अन्तर्मन से  कर आलिंगन तुझमे यही कही हूँ.... 
शिखानारी