दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही

दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही
दिल है तो दर्द होगा,दर्द है तो इश्क़ होगा ही ,इश्क़ है तो अश्क़ होंगे , फिर आशिक़ शहीद होंगे ही.

Friday, 17 March 2017

कच्ची माटी का घड़ा

कच्ची माटी का घड़ा 


नई ऋतु ,नया जीवन नई- नई सी आशाएं 
अभी छाव में हो तुम बालक ,
नई तुम्हारी इच्छाये।
जीवन में अब तक तुमने ,
दर्द की 'धुप' कहाँ अनुभव की है ?
अभी कहाँ इन ,'तृष्णाओंने', 
सोच तुम्हारी, परखी है। 
अभी बरसती तुम पर ममता ,
कहाँ  सही तूने गर्मी !
नही तपे तुम, अभी आग में 
कुंदन होना बाकि है।
कच्ची माटी का एक घड़ा हो ,
अनुभव में पकना बाकि है ।
अभी तुम्हारे भोले मन पर ,कहाँ सोच की रेखाये ,
अभी तुम्हारे हाथो पर भी धोखो के, 
छाले पड़ना बाकि है ।
सरल ह्रदय हो  कहाँ जानते तुम स्वार्थ की परिभाषा 
अभी ह्रदय की चंचलता का, 
दूषित होना बाकि है ।
अभी कहाँ समझे तुम छल को
ह्रदय टूटना बाकि है  ।
ओ मेरे मासूम, फ़रिश्ते !अभी तुम्हारा समय नही ,
अभी तुम्हे अपने ही गम में,
 डूब के बचना बाकि है।
शिप्रा नारी