स्याह
कितने रंगो में ये, गुलाब हमे महकता है,
आखिर इस नाज़ुक गुंचे में, रंग कौन भर जाता है ?
इतनी कोशिश करी मगर ,रंग ना पाया सपनो में ,
आखिर है कौन, वो माली जो सबको महकता है ?
पीला गेंदा लाल गुलाब सब के गहने बना लिये
फिर भी क्यों मेरे सपने काले कोई रंग नहीं आ पाता है.
शिखानारी