रिमझिम रिमझीम जलतरंग ये
भीगा भीगा मन का आंगन
मन मयूर मन वीणा के रागों पर,
देखो मन भावो से कर श्रृंगार ये
मन बसन्त मन मल्हार पर
नाच रहा है ,
लगता है उनके आने की
आहट सुन कर जाग रहा है ,
वो उनके स्वागत में देखो
अपने सारे पंख पसारे ,
अपनी आँखों को तक बिन झपकाए
खुशियो से यूँ भीगा - भीगा ,
कांप रहा है
उनकी बाहों की बस छतरी को मांग रहा है ,
वो साजन मेरा निर्मोही
मेरी तृष्णा भांप रहा है ,
यूँही हंस कर फिर मुझे हंसा कर
मेरी नींदे मांग रहा है ,
मन मयूर ये जाग रहा है
सुनो सजन, तुम दूर ही रहना ,
मुझसे अब कुछ भी ना कहना ,
देखो ना मन काँप रहा है ,
पर देखो ना माँ कहती है ,
मन की बाते कभी ना सुनना ,
जीवन में ये काला मन ही आस्तीन का सांप रहा है.
शिखानारी
भीगा भीगा मन का आंगन
मन मयूर मन वीणा के रागों पर,
देखो मन भावो से कर श्रृंगार ये
मन बसन्त मन मल्हार पर
नाच रहा है ,
लगता है उनके आने की
आहट सुन कर जाग रहा है ,
वो उनके स्वागत में देखो
अपने सारे पंख पसारे ,
अपनी आँखों को तक बिन झपकाए
खुशियो से यूँ भीगा - भीगा ,
कांप रहा है
उनकी बाहों की बस छतरी को मांग रहा है ,
वो साजन मेरा निर्मोही
मेरी तृष्णा भांप रहा है ,
यूँही हंस कर फिर मुझे हंसा कर
मेरी नींदे मांग रहा है ,
मन मयूर ये जाग रहा है
सुनो सजन, तुम दूर ही रहना ,
मुझसे अब कुछ भी ना कहना ,
देखो ना मन काँप रहा है ,
पर देखो ना माँ कहती है ,
मन की बाते कभी ना सुनना ,
जीवन में ये काला मन ही आस्तीन का सांप रहा है.
शिखानारी
