यादो की लेखनी ले कर कुछ फूल वक़्त के चुन लूँ
फुर्सत की इन घड़ियो में, कुछ टूटे सपने बुन लू,
मैं बीते लम्हे ढूंढू कुछ बीते वादे चुन लू
मैं सात रंग ना चाहू एक काला लम्हा चुन लू ,
टूटी कड़ियों को जोडू नई ख्वाब श्रंखला बुन लू
सपनो से खाली नींदे अश्क़ो से खाली आंखे ,
तू कहे तो मैं जीते जी कफ़न
अपनी ही लाश का बन लू ,
कभी इस किस्मत पर हंस लू
कभी इस किसमत पर रो लू .
शिखा नारी
