प्रेम नायिका
तन का रूप सवॉरू कैसे?
मन का रूप निहॉरू कैसे?
दीपक जैसी इन अॉखो में,
ख़ुद को बोल उतारू कैसे?
प्रेमगृंथ सा हर एक वादा,
पढ़ कर उसे बिसारूँ कैसे?
तेरे अमृत कलश अधर पे,
अपना सबकुछ वारूँ कैसे?
केश नागिनी जुल्फ घनेरी,
विष से ख़ुद को मारू कैसे?
नाज़ुक डाली देह तुम्हारी,
फुलकुस्मित है ये फुलवारी
कनक नन्दिनी प्रेमनायिका!
प्रेमबोझ पागल प्रेमी का,
बोलो तुम पर डालू कैसे?
बोलो तुम पर डालू कैसे?
ओ!प्रिया तुम अवरणिय हो,
बोलो नजर उतारू कैसे?
