प्रथम प्रेम
ये अनुभूति बड़ी नयी सी
इसमें लज़्ज़ा कही छुपी सी,
इसमें हृदय बड़ा आतुर सा
इसमें नयन दृष्टि चंचल सी ,
प्रथम निवेदन प्रथम प्रेम का
ये अभिवयक्ति बड़ी नयी सी,
नयनो का यूँ गति मय होना
पल में उठ पल में फिर गिरना ,
अधरों पर मुस्कान सलज्ज सी
पर चेहरे पर क्रोध का होना,
शब्दों में भर मधु मिठास सी
साजन को पागल हो कहना,
नयनो को बिना मिलाये
जाओ तुम बेमन से कहना ,
फिर जाने वाले साजन को
हम तेरे हैं स्वप्नों में कहना।
शिखानारी
