प्रेम का, वैराग का तू भाव है अनुराग का,
तू श्रंखला अभिव्यक्ति की माध्यम मेरे, अहसास का ,
तू चाँद जीवन रात्रि का मैं चांदनी इस चाँद की ,
तुम जिंदगी की पुस्तिका मैं दिन रात तुमको बांचती,
तुम में कही मैं खो गयी तेरी दुल्हन मैं हो गयी ,
बन कर तेरी मीरा सजन मैं "सांवरे" में खो गयी ,
तुम देव हो तुम पूज्य हो गंगा का निर्मल वेग हो,
मैं पापिनी !अज्ञान की तुमसे लिपट पावन हुयी,
अतिशयोक्ति नही यह सत्य है तू प्रेम का संकल्प है ,
मैं आकृति हू भावो की सुन तू तृप्ति मेरी हर प्यास की ,
मैं लतिका हू नाजुक सी एक तू दृढ़ सा कोई वृक्ष है ,
आकाश पर अब नज़र है तेरे वक्ष पर मेरी सहर है ,
मेरे हाथ मे तेरा हाथ है एक खूबसूरत डगर है ,
तुम रौशनी का एक दिया दिए में, मैं बाती पिया,
तुम रौशनी देते तो हो पर जल रही हु मैं ,सदा ,
तुम जिंदगी की धुन कोई मैं प्यार का एक साज़ हूँ
तुम गा रहे गीत जब मैं गीत की आवाज़ हूँ ,
नज़रो का मेरी नूर हो खुशबु हू मैं तुम फूल हो ,
धड़के तू दिल बन के यहाँ पर धड़कन में मैं ही, साँस लू
बिखरी सी मैं हु चाँद रे मुझको जरा सी साँस दे ,
अपना बना के ओ सजन जीवन को एक, एहसास दे।
शिखानारी
शिखानारी
