जीवन चित्र
मीठे लम्हे कुछ खट्टे पल , कुछ सच्चे क्षण ,कुछ बीते दिन
इन सबको मिला जुला के ही ,जीवन के है खट्टे मिट्ठे दिन
जब मिलन हुआ मीठा सा ,जब रार हुयी कुछ खट्टा सा
जब प्यार हुआ पूरा पूरा जब विरह हुआ तो टूटा सा
सारे पल को जोड़ के इन जीवन का चित्र बना अनूठा सा
हर जीवन का है चित्र यही कही रंग अधिक कही छूटा सा
राग वैराग अनुराग और बैर बने ,तूलिका जीवन की
अपने अपने भावो से रंग भरे है लोगो ने ,
कोई रंग कही पर ज्यादा है कोई रंग, कही पर कम ले के
कोई रंग कही पर ज्यादा है कोई रंग, कही पर कम ले के
ये जीवन चित्र किया लेकिन पूरा सबने
शिखानारी
