दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही

दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही
दिल है तो दर्द होगा,दर्द है तो इश्क़ होगा ही ,इश्क़ है तो अश्क़ होंगे , फिर आशिक़ शहीद होंगे ही.

Tuesday, 4 April 2017

करते रहो खताये

करते रहो खताये
चलो करले इश्क़ तुमसे कुछ नाम तो कमाए,
हम आज तेरे दिल में घर अपना यूँ बसाये
 ना रस्म जानते है ना दर्द जानते 
चलो आज ये भी सीखे
 किसी काम तो हम आये ,
दिल वैसे भी बेघर था तन्हा था बेअक्ल था 
तेरी शातिर बयानबाज़ी कुछ हम भी सीख जाए ,
कभी मेरा चाक दिल हो कभी तेरी बेवफाई
कभी हम हंसे खुदी पे कभी तेरी जगहँसाई , 
हम बेवतन मुसाफिर खुद से ही हार जाए
खाली हाथ आये खाली ही लौट जाए ,
मेरे हसफ़र ए क़ातिल क्यु ना
 मिलकर बदनामियां कमाए, 
ना तुम खबर बनो ही ना हम बने कहानी 
चलो "प्रेम ग्रन्थ" लिख कर दुनिया से लौट जाए , 
मैं तुम को हुस्न लिख दू तुम मुझको इश्क़ लिख दो ,
अरे! क्या फर्क पड़ेगा करते रहो खताये,
तुम गैर के शाने पर मासूमियत से रहना 
और बेकसूर हो तुम ये बार -बार कहना ,
हम तुमसे खुद ही आ के "मज़ारियत" करेंगे 
मेरे इश्क़! की मजबूरी तुमको तो रास आये। . 
शिखानारी