दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही

दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही
दिल है तो दर्द होगा,दर्द है तो इश्क़ होगा ही ,इश्क़ है तो अश्क़ होंगे , फिर आशिक़ शहीद होंगे ही.

Wednesday, 5 November 2014

सौतेली माँ

सौतेली माँ

मैं कैसे बुझने दू प्रकाश दीप
 अपने साजन के आंगन का 
वह फूल जो वृक्ष को विस्मृत है ,
आंसू है टूटी डालो का 
बोया मैंने ना सीचा ही ,
मैंने यूँही बस पाया है 
है प्यार मुझे हर पत्थर से
 जिस पर साजन का साया है 
खिलते देखा बढ़ते देखा ,
उसकी खुशबु पाने को 
साजन को,, अपने कांटो पर चलते देखा 
किस्मत का खेल कहू इसको ,
या पूर्वजन्म की माया है ,
अपनी सौतन के आँचल से गिरते, 
इन फूलो को अपने अंचल में छुपाया  है
सौतेली हूँ !पर माँ हूँ ना ,
ईश्वर ने ये, रिश्ता भी अजब बनाया है 
मैंने इन कोमल फूलो को अपने अंग लगाया है 
ना भी मिले खुशबु इनकी ,पर साजन का घर तो महकाया है 
अनजाने ही सब भूल गए ये घर जो महक रहा है फूलो से 
इन पर मेरा अक्स भी आया है 
ये घर तो अब मेरा भी सरमाया है