दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही

दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही
दिल है तो दर्द होगा,दर्द है तो इश्क़ होगा ही ,इश्क़ है तो अश्क़ होंगे , फिर आशिक़ शहीद होंगे ही.

Friday, 10 November 2017

क़द्र


                                                      क़द्र

अनगिनत चोटे और आहों पे पाबंदी भी 
मुझसे ही पर्दादारी फिर मुझसे ही ,रजामंदी भी,
पहले खुद मेरा क़त्ल किया फिर मातम में, बेहोश हुए 
तुम पहले ऐसे क़ातिल हो जो शब्दों से ही, मार गए ,
हम हाथ न रख पाए दिल पर तुम चाक जिगर कर ,चले गए 
लहू नहीं निकला मेरा  लकिन सीने से सब अहसास गए ,
साँसे तो अब भी बाकि है पर जिन्दा ही  हम कहाँ  रहे
ना चिता जली न हवन हुआ पर कब्र बनी अहसासों की, 
उस क़ब्र पे भी तुम्ही आये हर शाम लिए सौगाते भी 
आखिर मैं कैसे समझू की मैं जीती हूँ या चली गयी, 
तुम बोलो आशिक़ हो मेरे या तुमको मेरी क़द्र नहीं 
ऐसे कैसे हम जी पाए जब जीने का अहसास नहीं।