अभिव्यक्ति
आकृति भाव की धूमिल ,अभिव्यक्ति प्रेम की विस्मृत,
ओ मेरे रूठे हुये "साजन",मन की झनकार ,अवरोहित
वो मेरा प्यार ,अलोपित ,जाने से पहले उत्तर दो
मेरे सब प्रश्न ,अनुतरित,
मैं हूँ हर पल क्यों , आतंकित,
मैं हूँ हर पल क्यों , आतंकित,
है मेरा ये 'कागज़ दिल",आज लिख दो सभी उत्तर
मेरे दिल पर, मेरे कातिल ,क्यों जीवन प्रश्न हुआ है
मेरे दिल पर, मेरे कातिल ,क्यों जीवन प्रश्न हुआ है
क्या भूल हुयी है, मुझसे, जो भाग्य इस तरह विकृत,
क्यों भाव हुए यूँ विक्षिप्त ,वो कौन है जो दे देगा,
मेरे सपनो को अमृत, क्या यूँही दर्द सहूंगी ,
क्या मैं अतृप्त, मरूँगी ,क्या सबको अमृत देने को ,
मैं बस विषपान करूँगी ,क्यों प्यार बना है कातिल,
क्यों स्वप्न बने है कांटे ,क्यों घायल मन रोता है,
क्यों प्राण सदा ही बेकल क्यों, मैं अज्ञान भरी हूँ ,
क्यों सब है ज्ञान त्रिकाली ,
मैं हूँ हर भाव से बेकल ,मैं हूँ हर भाव से खाली
मैं हूँ हर भाव से बेकल ,मैं हूँ हर भाव से खाली
क्यों अब तक अतृप्ति है
जब तुम हो अलौकिक प्रेम की पलव्वित डाली
......... शिखा
जब तुम हो अलौकिक प्रेम की पलव्वित डाली
......... शिखा
