अनोखे रिश्ते
मैं माला हूँ ज़ज़्बातो की ,तुम सेहरा हो एहसासो का
मैं दुल्हन हूँ अरमानो की ,तुम दूल्हे हो हालातो के,
ओझल सा दिल का मंडप ,ये शादी हैं बस बातो की
पर दोनों साथ निभाएंगे, ये कस्मे है बिन वादों की,
जब तुम चाहो ,जो तुम चाहो ,जैसा चाहो ,ये वादा है
एक दूजे से आशा रखना ,है जगह कहा इन बातो की,
चाहो दो अपना कह देना, चाहो तो भूल साथ रहना
अब रिश्तो की मर्यादा तक खोयी है पूरब वालो ने ,
अब पूरब को पश्चिम करने की होड़ लगी ,इन साथो में।
शिखानारी
