दिल को कागज़ कर दिया ,अहसासों को पीस के
स्याही कँहा, जो मिट न सके जज़्बों के दर्द से
क्या जिंदगी की कविता लिखू ,अश्क़ो के रंग से
बे रंग ये इबारत ,मिट जाए ना शिकवों से तंज़ से
राजा हम, अपनी दर्द की रियासत के ,हो जाये फना ,
लापता सूखे हुए अश्क़ो से किसी मुफ़लिस के रंक के
shikha naari