फना
ना किया दीदार न एक पल भी बात की
ख्वाब में उनका तसव्वूर ,जिंदगी बर्बाद की
खिल के फूल फिर, खाक में भी मिल गए
आप ये कहते रहे जिंदगी गुलज़ार की ,
सामने आँखों के जलती रही चिताएं
आप समझाते रहे ये जिंदगी ,ऋतु है एक बहार की
कैसे दिखाए आपको रिसता हुआ, खूने जिगर
आप हर दर्द को कहते रहे ये ख्वाहिशे है प्यार की ,
जब फना हम हो गए, उस बेवफा के इश्क़ में
ना रहे हम ना हमारी आरज़ू ना ज़ुस्तज़ु,
कब्र पर मेरी सज़दा किया ,और बोले
हश्र ये ही आशिक़ी का होता ओ मेरे यार है,
जीत है तेरी ऐ, आशिक़! मत समझ ये दौलते है हार की ।
शिखानारी
