मैं नारी हूँ
मैं नारी हूँ श्रेष्ट्म बुद्धिमती
ना समझो केवल हूँ रति,
कुटिला मैं ही,हूँ मैं ही सती
मैं राधा भी,मैं ही मीरा भक्ति,
निर्भया मैं ही,मैं ही शक्ति
सरल कभी, कभी हूँ सख्ती,
इन अग्नि की ज्वालाओं पर
न कर शक ओ तू ,मूढ़ मति!,
मैं बहती हूँ शीतल धारा सी
कभी बाढ़ कभी अनावृष्टि ,
ममता से भरी त्याग मय माँ
पत्नी बन सात जन्म साथी ,
कभी सहती अत्याचार सभी
कभी बन के काली भी आती,
जो समझ मुझे साथ मांगो
मैं अग्नि पर चल के आती,
पर कोई भी कुदृष्टि अब
कर सहन नहीं अब मैं पाती।
शिखानारी
