सागर

सागर है जिंदगी और मोती हो तुम खरे
किसको पता यहाँ ,कौन डुबे कौन तरे ,
मंथन से ख्यालो के, तुमको उठा लिया
अब किसको ये खबर ,जख्म कितने सह लिए,
एक नाम लिखा खंजर से, अपनी हथेलियों पे
किस्मत की लकीरो से ,कब तक कोई डरे ,
इल्ज़ाम ऐ मुहब्बत, किस्मत की बात है
दीवानगी भला ये, सबको कंहाँ मिले ,
ये तन्हाई की जागीर ,ये बेवफाई के मसले
दिल अपना हुआ पराया ये ले लिया बयाना,
अब फैसला सुनाओ जी ले के फिर मरे।
शिखानारी