नींद
न चम्पा ना जूही ,न गुलाब ना गेंदा ही
खुशबु फूलो से ही आये ये ही क्यों हो सकता ही ,
क्या खुशबु बीते लम्हो की दिल में नहीं बसा सकते
क्या छाया की शीतलता वाणी में नहीं छुपा सकते ,
पंछी की तरह सोच को पंख लगा के क्यों फिर नीचे गिर जाते है
क्यों हम सब भी समय काल को ले नहीं, कही उड़ जाते है ,
क्यों स्वप्नों में बीते लम्हे आंखो में ही रह जाते है
रोज़ रात स्वप्नों में हर सुख अपना होता है ,
पर आँखों के खुलते ही जीवन खुद सपना होता है
हर आशा मंज़िल होती है हर दुविधा मिट जाती है
प्रश्न सिर्फ इतना सा है ,
क्यों नींद मुझे ना आती है ??????
शिखानारी
