बरसात का मौसम
ताउम्र आँखों में बरसात का मौसम
ताउम्र नयनो से मोती गिराते हम ,पर
मोती का खज़ाना किस पर लुटाते हम
सो,सारा दहेज़ अपना दामन में समेटा
हर एक मोती की सच्चाई परख कर
खुद सौदा मुहब्बत का घाटे में किया है
हर मोती हमने साजन तेरे सदके में
खुद, खुद को दिया है।
shikhanaari