अश्क़ो से गुफ्तगू
ना जानेगी कभी दुनिया हमे गम है तो वो क्या है
हमारी मुस्कराहट से सभी खुद को अनजान पाते है
अगर आँखों मैं आंसू है और लब पर हंसी भी तो
कोई कैसे कहे ही हम तुम्हे पहचान जाते है
अगर चाहो तो अश्क़ो से हमारे गुफ्तगू कर लो
क्यूंकि ,ये आंसू ही है जो राज सारे खोल आते है
ना बंधन मानते है ये,ना दिल की मानते है ये
बंद पलको में भी अश्के समंदर तूफान लाते हैं
होंठ कुछ कह नहीं पाते ,बस ये दिल धड़कता है
हमारी मुस्कुराहट पे अब सभी तरस खाते है
शिखा नारी