क्या जानोगे नारी को
जाओ दिल में बस के देखो
त्याग कमर कस के देखो
देह सुगंध तो चेतन है
अवचेतन बन के देखो
आँखों में आंसू बन के
होंठो पे आहे बन के
पीड़ा प्रसव समझते हो
आ जाओ प्रसूता बन के
सहो सास के ताने तुम
सहो पति की पुरुषाई
बेटो का भी कोप सहो
जिनको तुम ही जग में लायी
मर्यादा में बंध कर देखो
अनिच्छा हर काम
रोज़ रोज़ कर के देखो
न मन के वस्त्र मिले
ना मन की कोई बात सुने
सब को तुम खुश रखने को
खुद नारी बन के देखो
शिखानारी
