इकरार
मुहब्बत का इकरार उनसे
हुआ तो है पर अंदाज़ उनका ज़रा जुदा है
वो आज महफ़िल में आये तो है जैसे
बक़रारियो को अपनी सिला मिला है
मगर नज़र उठा के भी ना देखा
शायद वो हमसे ज़रा खफा है
ये अजनबीपन और ये बेरुखी भी
कही किसी तूफान का ना हो इशारा
सुना है इस दौर में आशिक़ी भी
कभी यहाँ तो कभी वहाँ है
शिखानारी