मंज़िले
मंज़िले सामने अपने मगर रस्ते अधुरे है
हमारा साथ देने को मिला एक हमसफ़र हमको ,
मगर ये किस्मतें अपनी की सब नक्शे अधूरे है
पार पर्वत को करने का हौसला दिल में रखते है ,
मगर जिस ओर देखे हम सभी मंजर अधूरे है
काश रिश्ता कोई ऐसा मिले जो संगदिल ना हो,
हमारी बदनसीबी ये की सब रिश्ते अधूरे है
जो उस पार जा के खो गए रस्ते अधूरे में,
जो कहानी दे गयी हमको जीने की निशानी भी
जो पूरी हो ना पायी वार के सारी जवानी भी,
मेरे दिल में आज तक उनके सारे सपने अधूरे हैं
वक़्त बीता ,उम्र बीती ,ये सारी जिंदगी बीती ,
पर ,वो मेरे बिन अधुरे है हम उनके बिन अधूरे है.
शिखानारी
