दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही

दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही
दिल है तो दर्द होगा,दर्द है तो इश्क़ होगा ही ,इश्क़ है तो अश्क़ होंगे , फिर आशिक़ शहीद होंगे ही.

Wednesday, 13 December 2017

बोझ

 बोझ

जीवन पर  एक  निबंध लिखू 
या दिल की बाते चंद लिखू 
वैसे तो लाख फ़साने है पर 
कह दू तो तुम पर ग्रन्थ लिखू 
इतना आसान नहीं है पर
 शब्दों में तुमको बाँध सकू
 सारी मर्यादा पार करू 
तब जा के तुम को बांच सकूँ 
दो तीन नहीं पुरे सौ होंगे 
अध्याय तुम्हारे कर्मो के 
कितनी बारी ही हनन किये 
तुमने मानव के धर्मो के 
बचपन से चलो शुरू कर दू 
पर माँ के दिल को क्या लिखू 
जिसको हर बार ही  तोडा है 
तुमने खुद को रुस्वा कर  के 
छोड़ो लिखती हूँ जब युवा थे 
पर क्या लिखू ?लेखनी सिहर गयी 
तुम खुद खुद पे शर्मिंदा थे 
अब वृद्ध हुए तन्हा ही हो 
क्या कोई साथी नहीं मिला 
लाखो रूहो को दहला कर भी
जो चलते थे राजा जैसे उनका  
अपना कोई भी डर के भी हुआ नहीं 
लो खतम हुआ जीवन तेरा 
पर शव के  साथ न एक कन्धा 
ना अश्क़ बहे ना दर्द हुआ 
बस शब्द सुना जो गूंज रहा 
था बोझ धरा का चला गया 
शिखानारी