दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही

दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही
दिल है तो दर्द होगा,दर्द है तो इश्क़ होगा ही ,इश्क़ है तो अश्क़ होंगे , फिर आशिक़ शहीद होंगे ही.

Friday, 15 December 2017

खंजर

                                                                           खंजर
                                                      



बड़ी अजीब फ़िज़ां है धुएँ में जहर मिला है 
नफरते हवा में गुम  हैं सांस में सिर्फ नशा है, 
कौन दुश्मन है यहाँ दोस्त भी, कौन यहाँ है
हर कोई किसी अनजाने से जालों में फसा है, 
उफ़ ये दर्द दिल का जख्म गहरा बड़ा है 
 उसी ने मारा है  खंजर जो कभी दोस्त रहा है,
 हम सह भी ले ये दर्द तो फिर देखिये आलम 
बेवफाई का खंजर कसम से तेज़ बड़ा है ,
वार पर वार मेरे दिल पे हंस- हंस के वो करने लगा है
ना याद उनको  मेरी वफ़ा मुहब्बत न अपनी  महरूमियाँ, 
याद बस शख्स एक, जो मेरी उल्फत से रार करता रहा है 
अपने महल के सामने मेरे दिल का  टुटा सा मकां ,
जिसपे वह तंज मेरे सामने उनसे करता रहा है 
मेरा साथी ये मकां छोड़ कर महलो में गया है, 
मेरा ये जख्मी दिल उनकी फिर भी 
उन की खुशियों की दुआ पढ़ता रहा है ,
देखो ना मुहब्बत ने उन्हें माफ़ किया है। 
शिखा नारी