दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही

दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही
दिल है तो दर्द होगा,दर्द है तो इश्क़ होगा ही ,इश्क़ है तो अश्क़ होंगे , फिर आशिक़ शहीद होंगे ही.

Wednesday, 15 November 2017

राज सागर के

राज सागर के

कैसे जानू मैं  राज सागर के ,
अपनी बाहो में लाखो लहरे छुपा के सोता है 
कितने कांटे है ,कितने मोती हैं ,
वो तो चेहरा अपना छुपा के सोता है 
कभी तूफ़ान कभी झंझावात, 
कभी शांत कभी बस खारा पानी 
कभी लहरों का वेग से उठना ,
कभी गर्जन और कभी काली घटा 
कभी बिजली कभी बरखा ,
कभी मेघ नीर को खुद सागर तरसा 
कभी सूरज का डूबना उसमे ,
कभी साक्षी मिलन के चाँद तारो का 
कभी नन्ही सी डूबती कश्ती का,
 टूट के फिर मिल जाना किनारो से 
मैं तो छोटी सी नदी बस हूँ ,
कभी बहती हूँ सूख जाती हूँ 
कभी बारिशो के मौसम में इसी सागर में डूब जाती हूँ। 
शिखा नारी