दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही

दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही
दिल है तो दर्द होगा,दर्द है तो इश्क़ होगा ही ,इश्क़ है तो अश्क़ होंगे , फिर आशिक़ शहीद होंगे ही.

Wednesday, 15 November 2017

मैं नारी हूँ

मैं नारी हूँ 

मैं नारी हूँ तो बदल जाऊ, पिघल जाऊ
और तुम दृढ चट्टान से खड़े रहो पुरुष ,
मैं बेल की तरह सहारा लू तुम्हारा ग़र ,
बढ़ने के लिए फूलने फैलने के लिए 
तो खुद को देव न समझने लगना, 
क्यूंकि ये भगवान् की अनुशंसा है 
अगर ना आऊं  पास तुम्हारे तो बस 
बचोगे क्या? एक चट्टान ,एक पत्थर ,
या एक दीवार तन्हा सी ,पुरानी सी 
कहाँ  कोई भी रिश्ता यहाँ पा सकोगे 
ना दादा ,ना नाना ,ना बेटा ,ना भाई ,ना पिता,
 किसके पति कहलाओगे ,सोचो 
हमारे बिना क्या पाओगे सोचो 
नमन करो !
नारी का जो उसने पत्थर को ,पिघला दिया 
एक वीरान ज़र्रे का  सारा  जहाँ, महका दिया, 
छू के तुम को इंसान कर  दिया 
वरना बिन छाया की, गिरती दीवारे ,
बस एक तन्हाइयो की धूल का, ढेर होती है
इस ढेर को उसने मांग में अपनी बसा दिया ,
फना  होने से पहले सोचो मगर,
 तुमने उससे क्या दिया ?