यूँही
ताउम्र जिस घड़ी का दिल ने रस्ता देखा
वो आ के कब बीत गयी पता तक ना चला
वादा मिलने का था फूल खिलने का था
वादा मिलने का था फूल खिलने का था
आप आये हम से मुखातिब भी ना हुए
और चले भी गए ये भी कोई बात हुयी
आप ने चाँद तारो के वादे किये कब
ना कभी ताज का ख्वाब हमको दिखाया
सिर्फ खुद की झलक दे सकोगे
ये ही कह कर के हमको मनाया
और फिर ये ख़ुशी भी हमसे छीनी
सिर्फ एक कागज़ का टुकड़ा ही पाया
नाम बस जिस पे तुम्हारा लिखा था
जिसे कलेजे से अबतक लगाया
पर ये तो फक्त बेरुखी है
मेरा नाम तक तेरे लब पे ना आया
वक़्त रुखसत का है अब तो देखो
किस तरह हमने रिश्ता निभाया
और चले भी गए ये भी कोई बात हुयी
आप ने चाँद तारो के वादे किये कब
ना कभी ताज का ख्वाब हमको दिखाया
सिर्फ खुद की झलक दे सकोगे
ये ही कह कर के हमको मनाया
और फिर ये ख़ुशी भी हमसे छीनी
सिर्फ एक कागज़ का टुकड़ा ही पाया
नाम बस जिस पे तुम्हारा लिखा था
जिसे कलेजे से अबतक लगाया
पर ये तो फक्त बेरुखी है
मेरा नाम तक तेरे लब पे ना आया
वक़्त रुखसत का है अब तो देखो
किस तरह हमने रिश्ता निभाया
आज भी वो एक कागज मेरे ताबूत में ही पड़ा है
डाल दी बस फ़क्त मेरी कब्र पर थोड़ी मिटटी
बेवफाई का इलज़ाम तक तुम पे देखो ना आया
डाल दी बस फ़क्त मेरी कब्र पर थोड़ी मिटटी
बेवफाई का इलज़ाम तक तुम पे देखो ना आया
shikhanaari
