दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही

दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही
दिल है तो दर्द होगा,दर्द है तो इश्क़ होगा ही ,इश्क़ है तो अश्क़ होंगे , फिर आशिक़ शहीद होंगे ही.

Saturday, 25 November 2017

यूँही


                                                                             यूँही 

ताउम्र जिस घड़ी का दिल ने रस्ता देखा  
वो आ के कब बीत गयी पता तक ना चला 
वादा मिलने का था फूल खिलने का था 
आप आये  हम से मुखातिब भी ना हुए 
और चले भी गए ये भी कोई बात हुयी
आप ने चाँद तारो के वादे  किये कब 
ना कभी ताज का ख्वाब हमको दिखाया 
सिर्फ खुद की झलक दे सकोगे 
ये ही कह कर के हमको मनाया 
और फिर ये ख़ुशी भी हमसे छीनी 
सिर्फ एक कागज़ का टुकड़ा ही पाया 
नाम बस जिस पे तुम्हारा लिखा था 
जिसे कलेजे से अबतक लगाया 
पर ये तो फक्त बेरुखी है 
मेरा नाम तक तेरे लब पे ना आया 
वक़्त रुखसत का है अब तो देखो 
किस तरह हमने रिश्ता निभाया  
आज भी वो एक कागज मेरे ताबूत में ही पड़ा है 
डाल दी  बस फ़क्त  मेरी कब्र पर थोड़ी मिटटी 
बेवफाई का इलज़ाम तक तुम पे देखो ना आया 
shikhanaari