सगाई
कभी की वफ़ा ,कभी बेवफाई
कभी बस मुहब्बत ,कभी जग हसाई
कभी एक लम्हा जहां सिर्फ, हम हो
कभी एक दुनिया जहा सिर्फ ,गम हो
कभी एक करवट ना बैठी, मुहब्बत
कभी है मिलन फिर कभी है ,जुदाई
कभी बेशरम तो कभी बेबसी है
वादों की झूटी कभी ये कसम है
आप से है ,गुज़ारिश फक्त ये हमारी
मुहब्बत के मारो परेशां ना होना
लगती है अपनी मगर है ये परायी
ये आशिक़ी मौत से है सगाई
शिखानारी
