आँखों ने
आज देखा कुछ नया सा ख्वाब आँखों ने
रात में नहीं आया सुबह ये ,ख्वाब आँखों में
जीत कर जिनकी ख़ुशी को हार, जाते थे
उनको देखा बहुत बेबस बेज़ार, आँखों ने
छोड़ कर जिसके लिए हमको गए थे वो
उनको देखा इश्क़ से लाचार इन्ही आँखों ने
बेवजह हम यूँही किस्मतो से रार करते थे
बेवफाई पर उन की ना जीते थे ना मरते थे
कर दिया अहसास के उस पार उन्हें आँखों ने
शिखानारी
