दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही

दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही
दिल है तो दर्द होगा,दर्द है तो इश्क़ होगा ही ,इश्क़ है तो अश्क़ होंगे , फिर आशिक़ शहीद होंगे ही.

Saturday, 25 November 2017

अनुकंपा

अनुकंपा


ईश्वर की अनुकंपा से मिलन  हुआ जब, विधना से 
दुःख की सीमाएं टुटी विरह हुआ जब ,सजना से ,
मैंने भी स्वप्ना देखा उनका कितना रास्ता देखा
लौट नहीं पाए घर जो फंस के ,काल  की क्रूर प्रत्यंचा में ,
कर्म गति ना टल पायी मन की दुल्हन, घबराई
वही हुआ जो होना था जल बिन मीन ना जी ,पायी ,
साजन के बिन तन मिटटी अश्क़ो की है ,अतिवृष्टी
शहर स्वप्न का तबाह हुआ आशाएं निष्प्राण हुयीं ,
मुरझाई बगिया में अब है पथराई सी मेरी हस्ती
सजना की सजनी हूँ पर, सजना से ही  बिसराई हूँ 
कहने को अब जीवित  हूँ पर जीवन की ठुकराई हूँ
शिखा नारी