धागे किस्मतो के
इस कदर ना होते हम तन्हा ना तुम इतने मेहरबान होते
तो इस कदर अजीब वाकये ना अपने दरम्यान होते ,
मेरी किस्मत से उलझी है तेरी मेहरबानियो की किरचियाँ
ये उलझन जिंदगी की सुलझाने में साँसे मेरी रुक जाएँगी ,
जहाँ से भी शुरू करूं सुलझाना किस्मत के धागो को
ये गांठे उलझनों की शायद तेरे कूंचे तक फिर हमे पंहुचायेगी,
क्यूंकि हर सिरा इनका तेरे दिल से निकलता तड़पता है मचलता है
सिरे का अंत दूर तक तन्हा चलने के बाद फिर मेरे ही दिल में होता है.
शिखानारी