जीवन यज्ञ
जब बरसेगा सावन अपने अरमा सी लुंगी
जब चमकेगी बिजली यूँही छुप के सो लुंगी,
गरजेगा जब बादल फिर तो ना सह पाऊँगी
दूर ना जाना मुझसे तुम साजन, मैं डर जाउंगी ,
जब इस गहन अँधेरे में बादल की, गर्जन होगी
धक् धक् - धक् धक् दिल में कोई गर , दस्तक होगी,
दरवाज़ा ना खोलूंगी ,मैं किस से क्या ,बोलूंगी
तुम दीपक बन के मेरे दिल के कमरे में रहना ,
तेल दीप में ,अश्क़ो का ऊपर तक भर दू सजना
प्रेम रौशनी तेरे में अब, फिर कैसा डर सजना ,
हाथ थाम कर मैं तेरा स्वप्नों ,मैं खो जाऊँगी
आने दो तूफान सजन जीवन से, लड़ जाउंगी ,
गर तुम मेरे साथ जलो ,जीवन यज्ञ बनाउंगी।
शिखानारी
