होता तो होगा
दिल से दिल का राब्ता होता तो होगा
अजनबी ही जिंदगी बन जाये तो फिर ,
किस्मतों का दर्द से मशविरा होता तो होगा
कोई अपरिचित अगर बेमक़सद याद आये,
तूफ़ानो को मंज़िल का पता होता तो होगा
कुछ भी नहीं है हम अपने खुदा के सामने ,
उनकी नज़रो में हमारा फैसला होता तो होगा
क्या पता ये जिंदगी कब क्या मोड़ ले ले ,
हादसों को जिंदगी का पता होता तो होगा
अश्क़ बहते है कभी ,कभी हँसते है हम भी ,
सलीका हर लम्हे को गुज़रने का होता तो होगा
अजनबी जिसकी बातो ने हमे इतना हसाँया,
कोई रिश्ता हमारे दरमियान होता तो होगा
ना हम माने न ये दिल ,ना मेरी आरज़ू भी ,
मगर फिर भी जो बहुत याद आये उससे
रूह का कुछ ना कुछ तो राब्ता होता तो होगा।
shikhanaari
shikhanaari
