दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही

दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही
दिल है तो दर्द होगा,दर्द है तो इश्क़ होगा ही ,इश्क़ है तो अश्क़ होंगे , फिर आशिक़ शहीद होंगे ही.

Tuesday, 21 November 2017

बेदखल

बेदखल

छम  से बरस जाऊ रिमझिम ,का गीत गाऊं 
ए  दिल न यूँ मचल तू तुझे, कैसे अब मनाऊ ,
इस तरहा ना धड़क तू कहि,मैं बहक ना जाऊं 
तन्हाइयो से बाहर महफ़िल नई सजाऊँ, 
मैं  खुद को भूल जाऊँ ,तुझे फिर ताउम्र बद्दुआ दू 
तुझे किसी काफिर को कही यूँही , दे ना आऊँ ,
आखिर क्या मामला है तुझे, किस ने क्या कहा है 
क्यों इस तरह तू पागल तड़पे, ही जा रहा है ,
वो जो तेज़ रौशनी है अपने ,घर की तो नहीं है 
तू गैर की बातो में क्यों खोता ही जा रहा है ,
या खुदा जाने मुझे ये क्या, होता ही जा रहा है 
दुश्मन हुआ है दिल ये धोखा ,दिया है उसने ,
एक अजनबी को देखो अपना , लिया है उसने 
किसी और के लिए ही अब वह ,धड़क रहा है ,
मेरा आज से ही अपने दिल से ना कोई वास्ता है 
अपने ही दिल को मैंने खुद से ,बेदखल किया है। 
शिखानारी