"रब"
काश! कभी ऐसा हो जाए
"खुदा" मिले और हम खो जायें,
फिर हमको ढूढ़े 'रब" अपना और
हमको उनको खूब सताये ,
अपनी अपनी किस्मत खुद लिखे
रोज़ नई रेखाएं बनाये ,
किसको दे क्या सजा किये की
रब को कुछ भी समझ ना आये,
फूल लगा दे पथ पर सारे
मिटटी से आकाश बनाये ,
"रब" को अपने घर धूल देख कर
उलझन मेरी समझ भी आये ,
उर्वशी रम्भा और श्री नारद
धरती पर ही स्वर्ग बनाये ,
सारे देव हमारे घर भी सज धज कर
जन्मदिनों पर भोज में आये ,
ना कोई भी हो उदास दर्द की हर, लकीर मिटाये
जो चाहे अपने ही हाथ से अपनी, किस्मत आप बनाये,
काश !कभी ऐसा हो जाए।
SHIKHA NAARI
