गुनाह
बेक़रारिया अपनी ना जाने किस ओर ले जाए
गलत तुम ना समझ लेना अगर हम यूँ करीब आये
फ़ितरते आशकी अपनी बहुत चर्चा में है लोगो
मगर ये किस को मालूम है ,इश्क़ अपना वफ़ा से है
तुम्हारी जुस्तजू हमको कभी ख्वाबो में तक ना थी
जो दो लफ्जो की तुमसे बात की कुछ चंद लम्हो में
ना जाने क्यों गुफ्तगू को तुम हमारी आरज़ू समझे
खुद को खुद ही खुदा समझा और खुद ही गिरा बैठे
लो ऐ अजनबी फिर आज तुम भी एक गुनाह कर बैठे
शिखानारी
