दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही

दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही
दिल है तो दर्द होगा,दर्द है तो इश्क़ होगा ही ,इश्क़ है तो अश्क़ होंगे , फिर आशिक़ शहीद होंगे ही.

Sunday, 26 November 2017

अरमान

 अरमान 
जीवन सम्भले या ना सम्भले ,होगा बोलो अब ,दर्द किसे 
अब समझे तो क्या समझे, दिल टूटा तो अब,फर्क किसे,
इस उजड़ी बस्ती में बस एक दीप ही ,काफी  था
अब ख़ुद को इस तरह जलाना रोज़ रोज़ यू रहने दो
जब गुलशन ये खिल ना पाये लाखों गयीं बसंत यूँही
अब पतझड़ के मौसम में तुम नये ख़्वाब मत पालो ना
अब अश्क़ो की बारिश से नयन भिगोना ,रहने दो 
तुमको जो अब समझ सके नहीं मिलेगा ,वो इंसान,
मयखाने में साकी ने अब तोड़ दिया है ,प्यालो को 
कैसे तेरी प्यास बुझे अब नहीं जगह ,दिलवालो को ,
यहाँ नहीं बाकी कोई जो अपने गम से, खाली हो 
चलो चले विरानो में अब दूर बसें ,श्मशानों में ,
शायद कोई पाकीज़ा रूह समझ सके अरमानो को। 
शिखानारी