किस्मत
नहीं भाती है खुशियों को
मेरी मुस्कान धीमी सी,
इसलिए पर्दा रखती हूँ
दर्द की पहचान झीनी सी,
नहीं मुझको ना समझो बर्फ
ना अग्नि हूँ ना पानी ही ,
मैं तो बस एक कहानी हूँ
जो बतानी भी छुपानी भी ,
ना मुझको दोस्ती भाती
ना कभी कोई अदावत ही,
मेरी किस्मत ने पूरी
मेरी ये सब जरुरत भी,
बस एक इंसान हूँ जिसको है
जीने की जरुरत भी ,
मुझे सब माफ़ करना
दिल वापस दिल में रख कर ,
मुझे अच्छी नहीं लगती
किसी की हो लगावत भी।
SHIKHANAARI
