चूड़ियाँ
चूड़ियो से मेरी आज हुयी है, लड़ाई
बहुत शोर करके करी मुझसे बेवफाई ,
जो सोचा की छुप की चलु दूर सबसे
इस बेवफा ने है छनक के, चुगली लगायी,
दे के जगह अपने हाथो में ,इसको
ये भूली की मैंने ही किस्मत, बनाई ,
जो साजन ने पकड़ा मेरा, हाथ यूँही
ऐसी जली की मेरी ,करी जग हसाई ,
मुझे चोट दे के मुझे दर्द दे ,के
छन छन छनाछन बहुत मुस्कुरायी ,
बहुत दोस्ती थी मेरी ,चूडियो से
मगर अंत में हो ही गयी फिर ,जुदाई
साजन ने छोड़ा मेरा हाथ ,लोगो
किस्मत से पर दोस्ती है, निभाई
लो खो गए वो उस पार इस जहाँ के ,
लो हो गयी हमारी चूड़ियों से जुदाई
लो खो गए वो उस पार इस जहाँ के ,
लो हो गयी हमारी चूड़ियों से जुदाई
शिखा नारी
