एक कहानी
अधखिली सी एक कली भी, फूल है बाकि खिले भी
गुलशनो में भ्रमर वर्जित ,तितलियाँ रंगो से खाली
लाख रंगो से रंगी मैं ,जिंदगी पर स्याह काली
हृदय के कोने में अब तक ,अनमनी सी एक किरण
नाम है एक अनसुना सा ,सत्य है पर अनकहा सा
भाव है अव्यक्त सारे ,प्रश्न है अनगिनित तारे
गीत भी संगीत भी पर ,रागनी की आवाज़ गुम
ये कहानी है की जिसमे ,मैं भी गुम तुम भी गुम
बस धुआँ ही धुआँ है धरती तो है आकाश गुम
शिखा नारी
