ज़िन्दगी
दुनिया में हमने यूँ भी गुजारी है जिंदगी
अपनी कहाँ है जैसे उधारी है ज़िन्दगी,
आवाज़ मुझको ना दे ऐ! गुज़रे वक्त सुन
मुश्किल से हमने अपनी सँवारी है ज़िन्दगी,
कोई ख़ुशी भी पहलू में आई नहीं कभी
मेरी नज़र में अब भी कुँवारी है ज़िन्दगी,
सोचो तो जी रहे है तुम्हारे ही वास्ते
जब चाहो माँग लेना तुम्हारी है ज़िन्दगी,
हर एक तन्हा छोड़ के कहता है अलविदा
कितनी ये बदनसीब, बेचारी है, ज़िन्दगी,
हम जी रहे है जिंदगी पर अनजान आज तक
कैसे भला हम सब ने गुज़री है जिंदगी ,
ताउम्र सिर्फ है यहाँ अनसुलझी गुत्थियां
एक प्यास है ,तड़प है या बेकरारी है जिंदगी।
SHIKHANAARI
SHIKHANAARI
