दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही

दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही
दिल है तो दर्द होगा,दर्द है तो इश्क़ होगा ही ,इश्क़ है तो अश्क़ होंगे , फिर आशिक़ शहीद होंगे ही.

Tuesday, 25 July 2017

बेमोल

बेमोल

मैं तो बस उड़ती फिरती थी, समय काल की किसे फ़िक्र थी 
काले भूरे हल्के  बादल या आंधी की गहरी चादर ,
हो भीषण गर्जन बिजली की या  बरखा की लगे झड़ी 
बाढ़ प्रलय हो या धरती पर  या सूखे की विकट घडी 
 हो तारो का झिलमिल आँचल या नदियो हो वेग मयी,
सब था अलौकिक- नैसर्गिक सब कुछ था कितना अपना 
जाने कब ये नयन बावरे ,रच बैठे तेरा सपना ,
सारी  सृष्टि मौन हो गयी रूह मेरी बेचैन हो गयी 
निर्मल पवन से झूठे वादे कलुषित मन- कलुषित इरादे, 
निर्मोही के जाल में फंस कर ,पंछी सी प्रलोल हो गयी 
किस्मत से कुछ साठ गांठ कर इन पंखो को काट काट कर,
तुम तो चले गए हो सजना हर सपने को काट छाट कर
जीवन नदिया का वेग प्रबल और मैं हूँ  एक टूटी कश्ती सी,
मैं बह जाऊ या रुक जाऊ आखिर ठोर कहॉ मै पाऊ 
मैं झरनो सी बहने वाली धरती पर माखौल हो गयी,
प्रेम विरहणी ,मधुर भाषिणी मैं क्यों डांवाडोल हो गयी 
किस्मत के तीखे तीरो से घायल मैं बेमोल हो गयी।