ये चाँदनी नहीं है,
जुगुनू की चमक है।
मुकम्मल रौशनी नहीं,
गुजर जाएगी दो पल में,
दिल्लगी है ये , दिल की लगी नहीं ,
मुहब्बत जिसे कहते हो
जिस्मो की दहक है
इन अहसासों से , दिल मेरे
धोखो की तीखी सी महक है ,
तेरे आरज़ू की लाश है
ये कोई दीवानगी नहीं
लम्हो को गुजरने दो,
ये आशिकी नहीं ,
हर शख्स को सिर्फ जिस्मो
की आरज़ू है,
खुशियों की ये माचिसे
कोई जिंदगी नहीं ,
जो रूह से तुझ को चाहे
ऐसी अब कोई शख्सियत नहीं।
शिखानारी
जुगुनू की चमक है।
मुकम्मल रौशनी नहीं,
गुजर जाएगी दो पल में,
दिल्लगी है ये , दिल की लगी नहीं ,
मुहब्बत जिसे कहते हो
जिस्मो की दहक है
इन अहसासों से , दिल मेरे
धोखो की तीखी सी महक है ,
तेरे आरज़ू की लाश है
ये कोई दीवानगी नहीं
लम्हो को गुजरने दो,
ये आशिकी नहीं ,
हर शख्स को सिर्फ जिस्मो
की आरज़ू है,
खुशियों की ये माचिसे
कोई जिंदगी नहीं ,
जो रूह से तुझ को चाहे
ऐसी अब कोई शख्सियत नहीं।
शिखानारी
