दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही

दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही
दिल है तो दर्द होगा,दर्द है तो इश्क़ होगा ही ,इश्क़ है तो अश्क़ होंगे , फिर आशिक़ शहीद होंगे ही.

Sunday, 2 July 2017

दर्द की बस्ती

दर्द की बस्ती

दर्द की बस्ती में बसर करती ही रहूगी
मैँ शमा हूँ हर पल- पल मैँ पिघलतीं ही रहूंगी,
मैँ आग हूँ पर इश्क़ की  शबनम में ढलूँगी
फूटेंगी कोंपले जब मेरी मुहब्बत की
यादो की छड़ी ले के चलती ही रहूंगी 
अश्क़ो के बादलो से गहरी घटा घिरेगी 
सींचने को अपना प्यार  बरसती ही रहूंगी,
मेरी वफ़ा के फूल से, महकेगी जिंदगी
बगिया  में जिंदगी की माली की तरह मैं ,
हर हाल में साथी मै सँभलती ही रहूंगी ,
नाजुक सी बेल बन के, फूलो से खुद को भर के 
तेरे ह्रदय के सहारे मैं, बढ़ती ही रहूंगी 
सावन में मैं खिलूँगी, पतझड़ में दर्द लूंगी ,
 सांवरे के चरणों में विश्राम करुँगी ,
ये मेरी मुहब्बत है, नहीं तेरी मुसीबत है ,
तुम चाहो  तो आ जाना देने, नयनो को राहते 
वरना तुम अपना घर बसाना ,गैरो के साथ रे' 
अपना क्या? आशिक़ है जी लेंगे यादो के सहारे ,
बीते हुए उन रेशमी लम्हो की  खनक से. . . 
शिखानारी