दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही

दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही
दिल है तो दर्द होगा,दर्द है तो इश्क़ होगा ही ,इश्क़ है तो अश्क़ होंगे , फिर आशिक़ शहीद होंगे ही.

Wednesday, 12 July 2017

परम् लिखाई

 परम् लिखाई
चलो गुज़ारू फिर कुछ लम्हे फिर जीवन को फिर ,व्यर्थ बिताऊ 
धीरे धीरे हौले हौले समय अंत के, पहुंच ही जाऊ, 
क्या सोचा क्या सपने देखे किससे, बोलू किसे बताऊ ?
किसने मेरे सब दुःख बांटे कहाँ कोई मेरा हमराही ,
हर रिश्ते में स्वार्थ देखा हर रिश्ते ने तृषा मिटाई 
देख अकेला कुछ रिश्तो ने धोखो से भी प्यास बुझाई ,
कुछ ने जज्बातो से खेला कुछ ने रूह का दिया हवाला
कुछ ने सपनो से भी खेला कर  दी ,मेरी जगत हसाई 
कहां  जिए हम अपना जीवन आधी उम्र, बिन जिए बितायी 
क्यों आये है ,क्यों है जाना ना समझे ना, मर्म ही जाना 
राग द्वेष के उलझे धागे मन मेरा ,बस  इत् -उत् भागे 
ना अपना ही पाया हमने ना, गैरो से करी  लड़ाई, 
खुद किताब जीवन  की यारो हमने अपनी, न पढ़ पायी 
सार हीन एक बंद ग्रंथ सा ,जीवन एक भूले से मंत्र सा 
खुशी  शब्द ढूंढा तो हमने पर विधना की , परम् लिखाई
मुझ मूढ़ मति को  समझ ना आयी. 
शिखानारी