ये सजा नहीं तो क्या है,
आईने में अपनी सूरत
सच से जुदा-जुदा है ,
अश्क़ो से भरी आंखे
माथे पे ये शिकन भी ,
आहो से भरी साँसे
लब पर खुदा- खुदा है,
हमको भी क्या किसी से
ये इश्क़ हो गया है ,
हम महफ़िलो में अक्सर
रहते अब ग़मज़दा है,
लाखो है दोस्त फिर भी
कुछ इंतज़ार सा है ,
मालूम तो नहीं पर
लगता ये प्यार सा है ,
उससे ही दुश्मनी है
जिसका खुमार सा है ,
उफ़ मेरे खुदा किस्सा
अपना थोड़ा सा अलहदा है ,
न उनको अपना माना
ना गैर ही कहा है ,
उनको यूँही सताना
और फिर उदास रहना,
अपनी ये जाने कौन सी अदा है।
शिखानारी
आईने में अपनी सूरत
सच से जुदा-जुदा है ,
अश्क़ो से भरी आंखे
माथे पे ये शिकन भी ,
आहो से भरी साँसे
लब पर खुदा- खुदा है,
हमको भी क्या किसी से
ये इश्क़ हो गया है ,
हम महफ़िलो में अक्सर
रहते अब ग़मज़दा है,
लाखो है दोस्त फिर भी
कुछ इंतज़ार सा है ,
मालूम तो नहीं पर
लगता ये प्यार सा है ,
उससे ही दुश्मनी है
जिसका खुमार सा है ,
उफ़ मेरे खुदा किस्सा
अपना थोड़ा सा अलहदा है ,
न उनको अपना माना
ना गैर ही कहा है ,
उनको यूँही सताना
और फिर उदास रहना,
अपनी ये जाने कौन सी अदा है।
शिखानारी
