दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही

दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही
दिल है तो दर्द होगा,दर्द है तो इश्क़ होगा ही ,इश्क़ है तो अश्क़ होंगे , फिर आशिक़ शहीद होंगे ही.

Monday, 5 June 2017

वंशबेल

वंशबेल 

मेंघो की सुन गर्जना ,पवन ये  घबरा गयी ,
बिजली जो लपकी ज़ोर से, वीर की तलवार सी 
 ये लताये क्यों ठिठकी खुशियों के आगाज़ से, 
 ये है बिदाई पतझड़ों की आने का बहार,एक अंदाज़ है ,
 पवन के डोले में अब तो खुश्बुओ की ,शाम है 
बिजलियाँ  सिन्दूर और आकाश, खाली मांग  है,
 आज होगा विवाह ,धरती और आकाश का
है बनी दुल्हन प्रकृति वृष्टि के ,स्नान से 
फूलो की ये फसल दुल्हन का एक ,श्रृंगार है 
तितलियाँ ही तितलियाँ, जेवरों सी सज गयी , 
ये नदी की गति ,वक़्त की आवाज़ है 
ये गिरिराज देखो आज, दूल्हे सा सजा है 
इनको भी अपनी दुल्हन "प्रकृति" का इंतज़ार है,
ये खुशबु पहली वृष्टि  की रिश्तो का नया, एहसास है 
होगी अब अमृत वर्षा ,देवो के आशीर्वाद सी 
अब तो  फिर महकेगी सृष्टि  ,होगा अब अदभुत मिलन  
देख कर पुलकित जमीं ,आज कृषक भी कन्यादान देंगे 
 हम सभी भी रोप के बीज, नव दम्पति को, "फूलो फलो" ये  वरदान देंगे,
हम हरा कर देंगे धरा को ,दुल्हन का घर बनाएंगे 
दुल्हन की वंश बेल ,साथ मिल कर बढ़ाएंगे। 
शिखानारी